まぁ神は天空から落ちてくるわけだけど、ヒンディーが出来なきゃ会話が出来ない。と云う事で、ヒンディーの練習。 पटना दुनिया के उन कुछ इलाकों में से एक है जो प्राचीन काल से आबाद रहा है । मेगास्थनीज (350 BC-290 BC), ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी पुस्तक इंडिका में पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र - आधुनिक पटना) नगर का उल्लेख किया है जो गंगा और अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) के प्रवाह संगम पर बसा था । यह 9 मील (14.5 कि.मी.) लम्बा तथा 1.75 मील(2.8) कि.मी. चौड़ा था ।
आधुनिक पटना नगर गंगा के दक्षिणी तीर के उस बिंदु पर स्थित है जहां गंगा, घाघरा, सोन और गंडक नदियों से मिलती है । यहां पवित्र गंगा का स्वरुप नदी का न होकर सागर जैसा लगता है - अथाह, भयंकर और अनन्त ।
लगभग 12,00,000 वासियों का यह नगर, प्रायः 15 कि.मी. लम्बा और 5 कि.मी. -7 कि.मी. चौड़ा है ।.
बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया और पावापुरी नगर के निकट ही हैं । पटना सिक्खों के लिये भी पवित्र स्थल है क्योंकि सिक्खों के 10वें और अंतिम मानव गुरु गुरू गोबिंद सिंह यहीं जन्मे थे । यह नगर आसपास के क्षेत्रों के लिये द्वार की तरह है । आसपास के भग्नावशेष नगर के ऐतिहासिक गौरव को प्रदर्शित करते हैं ।
एतिहासिक और प्रशासनिक महत्ता के अतिरिक्त, नगर चिकित्सा और शिक्षा का भी केन्द्र है । ये दुर्भाग्यपूर्ण हैै कि, केन्द्र सरकार की उपेक्षा और राज्य सरकार की चिन्ताहीनता ने शैक्षणिक संस्थानों, जो कि काफी पुराने और देश के शीर्षस्थ रहे हैं, की हालत, पिछले एक दशक से चिन्ताजनक कर दी है ।
दीवाल से घिरा नगर का पुराना क्षेत्र, जिसे पटना सिटी के नाम से जाना जाता है, भी एक प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र है ।